कितना समय लगता है?
एक वेबसाइट में आम तौर पर दो से तीन हफ़्ते। मोबाइल ऐप के पहले वर्ज़न में छह से बारह हफ़्ते — यह देखकर कि उसे करना क्या-क्या है — और आख़िर में स्टोर की जाँच का समय अलग। असली समय हम लिखित ब्यौरे के साथ पहले ही बता देते हैं, काम मिलने के बाद नहीं।
कोड पर हक़ किसका रहेगा?
पूरा आपका। सोर्स कोड, डोमेन, स्टोर की लिस्टिंग, सर्वर और डेटाबेस — सब आपके अपने अकाउंट में। लॉन्च के समय सारे पासवर्ड आपको सौंप दिए जाते हैं। कल आप किसी और से काम कराना चाहें, तो हमारी तरफ़ से कोई अड़चन नहीं।
खर्च कितना आएगा?
यह इस बात पर है कि बनाना क्या है, इसलिए हम हर काम का अलग हिसाब देते हैं। रेट लिस्ट छापने का कोई मतलब नहीं — वह आपके काम पर बैठेगी ही नहीं। पहली बातचीत और लिखित अनुमान, दोनों मुफ़्त। और जो क़ीमत लिखकर दे दी, उस काम के लिए वही रहती है।
ऐप को Play Store और App Store पर कौन चढ़ाएगा?
यह भी हम ही करेंगे — और सलाह यही रहती है कि अकाउंट आपके नाम पर बने और हमें डेवलपर के तौर पर जोड़ दिया जाए। बिल्ड, साइनिंग, लिस्टिंग, स्क्रीनशॉट, स्टोर की माँगी गई प्राइवेसी पॉलिसी और जाँच की पूरी प्रक्रिया हमारे ज़िम्मे — नए अकाउंट पर Google जो टेस्टिंग कराता है, वह भी।
लॉन्च के बाद क्या?
ऐप लॉन्च होकर ख़त्म नहीं होता। फ़ोन अपडेट होते रहते हैं, स्टोर के नियम बदलते हैं, सुरक्षा के पैच आते हैं, और यूज़र ऐसी चीज़ें पकड़ते हैं जो पहले किसी को नहीं दिखीं। आगे क्या करना सच में ज़रूरी है, यह हम बता देंगे — और ज़रूरत पड़ने पर या हर महीने तय समय पर मदद देते रहेंगे। लेना ज़रूरी नहीं है।
क्या छिंदवाड़ा से बाहर भी काम करते हैं?
हाँ। रहते हम छिंदवाड़ा में हैं, पर काम कहीं का भी लेते हैं — फ़ोन, ईमेल और एक टेस्ट लिंक, जिसे आप अपने फ़ोन पर खोलकर देख सकें। इसके लिए आमने-सामने बैठना ज़रूरी नहीं, हालाँकि बड़ी बातचीत के लिए मिलने में हमें ख़ुशी होगी।
NDA साइन करेंगे?
ज़रूर। आपका हो तो भेज दीजिए; नहीं तो कहिए, हम एक सीधा-सादा भेज देंगे। वैसे भी आपका आइडिया और आपका डेटा आपका ही रहता है।
हमें बस एक छोटी-सी वेबसाइट चाहिए, क्या यह काम बहुत छोटा है?
बिलकुल नहीं। एक पेज की अच्छी, तेज़ साइट भी पूरा काम है — और छोटे कारोबार के लिए सबसे काम की चीज़ों में से एक। कई बार लंबी बातचीत की शुरुआत भी यहीं से होती है।